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कैडबरी डेरी मिल्क की सफलता कहानी जानिए हिंदी में | Cadbury Dairy Milk Success Story

Written by Dipak kalaskar
  
चॉकलेट की बात करते समय सबसे पहले दिमाग में जो ब्रांड आता हे वो हे cadboury।
                
                    इसका शानदार रंग, मखमल जैसी चिकनी  बनावट ,महेक और स्वाद जैसे बहोत सारे गुन है जो आसानी से सबको अपनी और खींच लेते है।
                  
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                  आज हम जानेंगे दुनिया पर कही दशकों से राज करने वाली चॉकलेट कंपनी Cadbury के बारे में।

                    जॉन कैडबरी का जल्म 216 साल पहले ब्रिटेन में बिरमिन्गम। जॉन एक कुहकड़ धर्म से थे। और इस धर्म के लोगो की अपनी अलग हे मान्यता थी। वे चर्च या किसी भी धार्मिक संस्तान से जुड़े नहीं थे। अपनी अलग मान्यता होने से उन्हें समाज में अलग नजरिये से देखा जाता था। न ही उन्हें किसी अच्छे स्कूल में दाखिला मिलता और न ही उन्हें कोई अच्छी जॉब। यहातक की वो सेना में भी नहीं जा सकते थे। फिर उनके पास एक ही ऑप्शन था अपना खुद का एक बिज़नेस करना इस्सलिये अपने धर्म के स्कूल में पढ़ायी करने के बाद जॉर्ज कैडबरी अपनी पॉकेटमनी के लिए कॉफी शॉप पे काम करने लगे। 

                    और फिर आगे चलकर 1824 में उन्होंने अपना खुद का दुकान खोला। जहा पर वे कॉफी ,चाय और चॉकलेट ड्रिंग बेचा करते थे। अगले कुछ सालो के एक्सपीरियंस के बाद उनको पता चला की उनके चाय और कॉफी से ज्यादा लोग चॉकलेट ड्रिंक को पसंद कर रहे है। और फिर 1831 से उन्होंने चाय और कॉफी को छोड़ कर सिर्फ चॉकलेट ड्रिंक बनाने में फोकस किया। जिससे डिमांड बहोत तेज़ीसे बढ़ने लगी और उसी साल चॉकलेट ड्रिंक्स के करीब 16 और वैरायटी अपने मेनू में ऐड कर दिए।
                    
                    देखते ही देखते १५ सालो में अपने आस पास के सभी इलाकों में अपने स्पेशल चॉकलेट ड्रिंक के लिए फेमस हो चुके थे। आगे चल कर 1837 में जॉन ने अपने भाई बेंजमेंन को भी अपने बिज़नेस में शामिल कर लिया। और फिर दोनों ने मिलकर ब्रिज स्ट्रीड में एक बहोत बढ़ा कारखाना खोला। 
               

                    कैडबरी सुरु से हे अपने क्वालिटी के लिए जनि जाती है। इसलिए रानी विक्टोरिया ने उनके कंपनी को रॉयल वारंट का  सर्टिफिकेट दिया। और रॉयल वारंट का सर्टफिकिट सिर्फ उन्ही उत्पादोको मिलता था जिनकी क्वालिटी बहोत ही अच्छी थी। और जिन उत्पादोको राजा महाराजा भी अपने प्रयोग में ला सकते थे।

                    धीरे धीरे कैडबरी अपने बेहतरीन उत्त्पादनो की वजे से पुरे ब्रिटेन में प्रसिध्द हुई। और फिर 1860 के आसपास बिज़नेस में कोई नोक जोक की वजेसे भाई बेंजमेंन ने अलग होने का फैसला किया। उसके बाद  जॉर्ज की उम्र भी ढलती जा रही थी तो फिर जॉन ने अपने कंपनी की कमान अपने 2 बच्चो रिचर्ड और जॉर्ज को देदी। किसीभी उत्पाद को जारी रखने के लिए जरुरी है समय के साथ परिवर्तन। रिचर्ड और जॉर्ज ने कंपनी की कमान सँभालने के बाद बहोत सारे नए नए परिवर्तन किये  काफी हद तक सफल भी रहे। पुरे ब्रिटेन में अपना कब्ज़ा ज़माने के बाद 1870 में कैडबरी को दूसरे देशो में भी भेजा जाने लगा। इसी बिच 11 मई 1899 को कैडबरी के फाउंडर जॉन कैडबरी की मृत्यु हुई और फिर अगले 10 सालो में उनके बेटे रिचर्ड के भी मृत्यु हो गयी। जिसके बाद बचे जोर्ज कैडबरी जिन्होंने अपनी रेटारमेंट से पहले ऐसा खोज किया जिसने कंपनी को एक नयी उचाई पर पोहचा दिया। जॉर्ज में 1905 में कैडबरी की मशहूर चॉकलेट डेरी मिल्क का अविष्कार किया। जिसका रिसर्च वे 1897 से वे कर रहे थे। जॉर्ज कैडबरी डार्क चॉकलेट के साथ कुछ नया बनाने के प्रयोग में लगे हुए थे। उन्होंने चॉकलेट पॉउडर में चीनी और दूध मिलाया और जब इसके मिक्सचर को चखा गया तो इसमें कमाल का स्वाद था।
 
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                    और जब इसे सूखा कर चखा गया तो स्वाद और भी जबरदस्त हो गया था। और कुछ इसी तरह से कैडबरी की डैरीमिल्क चॉकलेट बनी। जो आज भी कैडबरी ब्रांड की सबसे चेहेति चॉकलेट है। 1948 में आज़ादी के ठीक एक साल बाद कैडबरी ने भारत में भी दस्तक दी और यह भी वो अच्छे क्वालिटी और टेस्ट की वजेसे वो लोगोकी आदत बन गयी।   

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                    तो दोस्तों देखा आपने कैडबरी जैसे मल्टीनेशनल कंपनी की नीव किसी ऐसे व्यक्ति ने रखी  जिसे अपने पसंद का स्कूल तक नसीब नहीं था। उम्मीद हे की आपको भी कैडबरी की success स्टोरी से बहोत कुछ सिखने को मिला होगा। यदि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिये। हम आपको ऐसे हे Inspire करते रहेंगे।   

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